बस अब उस दिन का इंतजार है, जब तुम मुझे भूल जाओ।
और तुम्हे दस्तक़ दे, मेरे वो संवाद जो शायद में तुमसे कभी कह ही नही पाऊँ।
क्योंकि मेरा जीवन संवेदन हीनता में बीता है, जहाँ दर्द की अनुभूति मात्र ही भ्रम है।
और ये सब आडंबरों में उलझा मेरा ही अक्स, जो अपने अस्तित्व को सतह से नकारता है,
हर बार इतिहास को झुठला देने की कवायद करता,
भावशून्य उज्जड मन से तुम क्या अभिलाषा रखती हो,
ये बहुत ही जटिल मानसिकता है, मैं महिष्मति में जन्मा मातृसत्तात्मक समाज से तो हु नही, मैं उसी राष्ट्र से हु, जहा गले लगाने से पहले लिंगभेद , जातिभेद, उद्देश्य और मानसिकता को टटोला जाता है।
तो जब तक ये सब दिमागी गोबर खपा नही देता, तब तक तुम मुझे एक अय्यार जानना।
और मुझे सतह से भूला देना, क्योंकि में अभिशप्त हूँ, समाज के विश्वासों से अलग, अघोर का प्रशंसक, और
सामाजिक परिधि से दूर।
- गुमराह मोगैम्बो।
और तुम्हे दस्तक़ दे, मेरे वो संवाद जो शायद में तुमसे कभी कह ही नही पाऊँ।
क्योंकि मेरा जीवन संवेदन हीनता में बीता है, जहाँ दर्द की अनुभूति मात्र ही भ्रम है।
और ये सब आडंबरों में उलझा मेरा ही अक्स, जो अपने अस्तित्व को सतह से नकारता है,
हर बार इतिहास को झुठला देने की कवायद करता,
भावशून्य उज्जड मन से तुम क्या अभिलाषा रखती हो,
ये बहुत ही जटिल मानसिकता है, मैं महिष्मति में जन्मा मातृसत्तात्मक समाज से तो हु नही, मैं उसी राष्ट्र से हु, जहा गले लगाने से पहले लिंगभेद , जातिभेद, उद्देश्य और मानसिकता को टटोला जाता है।
तो जब तक ये सब दिमागी गोबर खपा नही देता, तब तक तुम मुझे एक अय्यार जानना।
और मुझे सतह से भूला देना, क्योंकि में अभिशप्त हूँ, समाज के विश्वासों से अलग, अघोर का प्रशंसक, और
सामाजिक परिधि से दूर।
- गुमराह मोगैम्बो।
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