इतना भी ना गहरा समझा,
की मुश्किल हो भूलने की प्रतिक्रिया।
उसने तो सिर्फ़ दोस्त माना,
हमने बेशुमार प्यार किया।
दिल को जो ना मिली तसल्ली,
तो उससे कभी इजहार किया।
उसने सरे आम बेइज्जत करके
मेरे इश्क़ को बदनाम किया।
इश्क मेरा सतही रह गया,
मुस्कुराते यूँ रिजेक्शन को स्वीकार किया।
अब हूँ न हाँ सब एक समान,
टकटकी लगाए देखता हूँ,
की कभी तो समय आएगा,
कोई मुझे भी देशकाल ओ सीमा के परे बेपनाह चाहेगा।
की मुश्किल हो भूलने की प्रतिक्रिया।
उसने तो सिर्फ़ दोस्त माना,
हमने बेशुमार प्यार किया।
दिल को जो ना मिली तसल्ली,
तो उससे कभी इजहार किया।
उसने सरे आम बेइज्जत करके
मेरे इश्क़ को बदनाम किया।
इश्क मेरा सतही रह गया,
मुस्कुराते यूँ रिजेक्शन को स्वीकार किया।
अब हूँ न हाँ सब एक समान,
टकटकी लगाए देखता हूँ,
की कभी तो समय आएगा,
कोई मुझे भी देशकाल ओ सीमा के परे बेपनाह चाहेगा।
- जीतू
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