आजकल बेतुके से सवाल करती है ,
मेरी तन्हाई मुझसे कुछ यूँ बात करती है |
मेरी तन्हाई मुझसे कुछ यूँ बात करती है |
कहती है मिलना, जुलना छोड़ दो,
रिश्ते सभी तुम तोड़ दो |
जो चाहते हो साथ मेरा ,
सबसे दूरी जोड लो |
रिश्ते सभी तुम तोड़ दो |
जो चाहते हो साथ मेरा ,
सबसे दूरी जोड लो |
मनाने उसको जतन सारे ,
मैं फटाफ़ट कर् डालता हूँ |
कोई पुछे friend भले पर ,
खुदको offline कर डालता हूँ |
मैं फटाफ़ट कर् डालता हूँ |
कोई पुछे friend भले पर ,
खुदको offline कर डालता हूँ |
उससे भी टस से मस ना हुएे ,
वो दुसरी demand कर डालती है|
tv और radio छोड़ ,
मुझे कागज फिर थमाती है,
कहती है , बिना रुके अब लिखना है,
किसीको याद नहीं करना है |
वो दुसरी demand कर डालती है|
tv और radio छोड़ ,
मुझे कागज फिर थमाती है,
कहती है , बिना रुके अब लिखना है,
किसीको याद नहीं करना है |
थक हार के मैं जब ,
ज़ेब अपनी टटोलता हूँ ,
तब वो अपना अंतिम शस्त्र चलाती है|
चाहते हो तुम सबसे ज्यादा किसे ?
इसका जवाब चाहती है |
ज़ेब अपनी टटोलता हूँ ,
तब वो अपना अंतिम शस्त्र चलाती है|
चाहते हो तुम सबसे ज्यादा किसे ?
इसका जवाब चाहती है |
जानते हुएे की श़क करेगी ,
मैं अपना नाम लेता हूँ ,
की अबके, रूठ के बाते कुछ बंद होंगी ,
पर इसके उलट,
वो मुझे रात का सलाम कहती है |
और एक और दिन का पयाम कहती है |
मैं अपना नाम लेता हूँ ,
की अबके, रूठ के बाते कुछ बंद होंगी ,
पर इसके उलट,
वो मुझे रात का सलाम कहती है |
और एक और दिन का पयाम कहती है |
आजकल बेतुके से सवाल करती है ,
मेरी तन्हाई मुझसे कुछ यूँ बात करती है |
मेरी तन्हाई मुझसे कुछ यूँ बात करती है |
~ ज़ितु सिंधी
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