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Tuesday, July 31, 2018

ताबेदार

मैं एक सफ़ेद ओ स्याह झूठ हूँ, जो तुम्हारी सच की हथेलियों से फिसल रहा हूँ।
और मैं उन बेमिसाल ख़्वाबगाहों में सुगबुगाते हरेक उस मंज़र का ताबेदार हूँ, जो तुमसे प्यार के उस लालच से किए गए वादों में शुमार है।।
मेरे तिलिस्म से रची बंधी तुम्हारी हाथ की लकीरें, आधी टेढ़ी, आधी सीधी और बने कुछ त्रिकोण, सबन्धों के जंजाल में जकड़ी तुम्हारी रूह,
आज भी आदतन मुझे समेटने और सँजोने के तजुर्बे में फ़ना हुए जाती है।
पर तुम्हें ताकीद है, की मुझे तुम पनपने ना दो, और नाही फँसो मेरे इस मायाजाल मै, जहाँ मै, अकेला, इस दुनिया के आखिरी अय्यार को नेस्तनाबूद करने की जिद मैं, सबसे बड़ा मक्कार बन बैठा।।
- ग़ुमराह मोगैम्बो, जितेंद्र चोइथानी

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