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Sunday, August 1, 2021

कभी मान भी जाओ

 

जब सर्द रातों में,

ठिठुरते हो हाथ,

पाँव में न हो मोजे,

और न कम्बल का साथ| 


भीख सही,

 या अहसान कभी,

यूँ न ठुकराओ,

जिन्दगी कहती है,

ए प्यारे.

कभी मान भी जाओ


दिल में भरी हो उदासी,

और न हो संगी साथी,

कलम कागज को,

बना के साथी

कल्पना को यूँ न दबाओ

कभी मान भी जाओ


जब जेब में न हो धेले चार,

पेट की आफत,

पुकारे साथी,

गुरूद्वारे में प्रसाद खा के,

शर्म में न डूब जाना

कभी मान भी जाओ


धोखे हुए जब हजार 

मरने का मन करे बार बार

तब उपरवाले के लिए

न कूदना

बचाना अपनी जान

कभी मान भी जाओ




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