बरबस टटोलना तुम खुद को,
पर तुम्हारी यादों से, कपूर की तरह उड़ जाऊँगा मैं।
बर्फ़ की तरह छवि सम्भाल कर रखना तुम,
और मैं जून की गर्मी सा भाप में उड़ जाऊँगा। ।
पर तुम्हारी यादों से, कपूर की तरह उड़ जाऊँगा मैं।
बर्फ़ की तरह छवि सम्भाल कर रखना तुम,
और मैं जून की गर्मी सा भाप में उड़ जाऊँगा। ।
मैं एक अतीत हूँ,
एक अनन्त यात्रा का पथिक।
जिसका कोई विराम नहीं,
जो प्रचंड अघोर है।
मैं प्रति पल आगे बढ़ रहा
अपनी उसी काली दुनिया में,
जहाँ कहीं कोई आवाज़ नहीं आती।
न सूर्य की कोई किरण है,
न नव संरचना,
और न ओस में कुम्हलाता,
कोई नव अंकुर जीवन का।।
एक अनन्त यात्रा का पथिक।
जिसका कोई विराम नहीं,
जो प्रचंड अघोर है।
मैं प्रति पल आगे बढ़ रहा
अपनी उसी काली दुनिया में,
जहाँ कहीं कोई आवाज़ नहीं आती।
न सूर्य की कोई किरण है,
न नव संरचना,
और न ओस में कुम्हलाता,
कोई नव अंकुर जीवन का।।
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